श्री शनि चालीसा PDF | Shree Shani Chalisa Pdf

नमस्ते दोस्तों, आप में से बहुत सारे लोग श्री शनि देव के भक्त होंगे जिन्हें शनि देव का पाठ करने के लिए Shree Shani Chalisa Pdf की आवश्यकता होती हैं तो इसलिए हम लोग आपको श्री शनि चालीसा डाउनलोड पीडीऍफ़ शेयर कर रहे हैं।

मित्रों इस आर्टिकल में आख़िर में Shree Shani Chalisa Pdf Download Link दिया हैं जिससे आप इस पीडीऍफ़ को आसानी से और सरल तरीके से डाउनलोड कर पायेंगे।

श्री शनि चालीसा का पाठ करने से जीवन में आगमन होता हैं। अगर आप शनि देव की द्रष्टि हैं तो आपके जीवन में कुछ भी सही नहीं होएगा जो भी कार्य करेंगे वो उल्टा होयगा क्योंकि शनि देव को न्याय का देवता मन जाता हैं इनके द्रष्टि से देवता भी नहीं बच पते इसलिए नियमित रूप से शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए जिससे शनि देव प्रसन्न होए और आप पर शनि देव की ईश्वरकृपा बनी रहे।

शनिदेव को सरसों का तेल ही क्यों चढाया जाता हैं ?

रामायण के अनुसार जब हनुमान जी राम जी के आदेश पर सीता माता की खोज के लिए लंका जाते हैं तो वहाँ हनुमान जी शनि देव को रावण द्वारा बंदी बना हुआ देखते हैं। जिस पर शनि देव हनुमान जी से मुक्त कराने के लिए कहते हैं।

शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए हनुमान जी शनिदेव को लंका से दूर उछाल देते हैं जिससे वो सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाते हैं | लकिन हनुमान जी के द्वारा शनिदेव को उछाले जाने पर शनिदेव के शरीर पर बहुत चोट लग गई तब शनिदेव की पीड़ा को समाप्त करने के लिए हनुमान जी ने उनके घाव पर सरसों का तेल लगाया जिससे उन्हें आराम मिला |

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इस सब से खुश होकर शनि देव ने वरदान दिया कि जो भी भक्त शनि देव को सरसों का तेल चढ़ायेगा उस पर शनि की कृपा हमेशा बनी रहेंगी।

श्री शनि चालीसा कैसे पढ़ें:

  • अपने शरीर और मन को शुद्ध करने से आरंभ करें।
  • प्रकाश और धूप की ओर संकेत के रूप में एक दीपक और धूप जलाएं।
  • उत्कृष्ट और ईमानदार दिल के साथ श्री शनि चालीसा का उच्चारण करें।
  • भगवान शनि की ध्यान में चित्त लगाएं और उनकी आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
  • प्रार्थना के साथ पूरी करें।

शनि चालीसा हिंदी में | Shree Shani Chalisa

श्री शनि चालीसा (हिन्दी) ॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला ।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
हिय माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया नन्दन ।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन ॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा ।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं ।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत ।
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो ।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई ।
मातु जानकी गई चुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा ।
मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गतिमति बौराई ।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका ।
बजि बजरंग बीर की डंका ॥

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नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी ।
हाथ पैर डरवाय तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों ।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी ।
भूंजीमीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई ।
पारवती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी ।
बची द्रौपदी होति उघारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो ।
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला ।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देवलखि विनती लाई ।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

वाहन प्रभु के सात सजाना ।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी ।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं ।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
गर्दभ सिद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै ।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा ।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं ।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी ।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला ।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई ।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत ।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा ।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

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श्री शनि चालीसा के लाभ

शनि देव सूर्य देव के पुत्र हैं और न्याय का देवता भी कहा जाता हैं। अगर किसी मनुष्य के कर्म अच्छे हैं तो उसके जीवन में अच्छा ही होयेंगा लकिन कोई मनुष्य अपने जीवन में पाप करता हैं तो उस पर शनि देव की द्रष्टि पड़ जाती हैं और अगर किसी पर शनि देव की दृष्टि पद गयी तो उसके जीवन में सारे कार्य उलटे होने लग जायेंगे ,वो दुःखी रहने लग जयेगा, उसके घर में लड़ाई -झगड़े शुरू हो जायेंगे। इसलिए शनि देव का प्रकोप बहुत हानिकारक हैं।

लकिन आप नियमित रूप से शनि चालीसा का पाठ करते हो तो आप पर कभी -भी शनि देवी की द्रष्टि नहीं पड़ेंगी बल्कि आप से शनि देव प्रसन्न हो जायेंगे। आपके जीवन में शनि देव की ईश्वरकृपा होने से आपके घर में कलेश नहीं होयेंगे ,आपके शत्रु आपका अहित नहीं कर सकेंगे और शांतिपूर्वक जीवन का आनंद मिलेंगा।

Shree Shani Chalisa Pdf

PDF Nameश्री शनि चालीसा PDF
Categoryसनातन धर्म
Languageहिंदी
Pages16
PDF Size0.84 MB
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Conclusion | निष्कर्ष

मित्रों हमने इस पोस्ट में शनि भक्तों के लिए Shree Shani Chalisa Pdf शेयर किया हैं जिससे आप शनि देव का पाठ करके शनि देव को प्रसन्न कर सकें । इसके साथ ही हमने शनि देव का पाठ करनी की विधि और नियम भी बतया हैं। अगर आपको इस पीडीऍफ़ को डाउनलोड करने में कोई समस्या आ रही हैं तो हमें कमेंट करके जरूर बताए।

Faq About Shani Chalisa Pdf

  1. शनि चालीसा को पढ़ने का सही तरीका ?

    शनि चालीसा को पढ़ने का शनिवार या मंगलवार को शाम 5 बजे के बाद शनि देव के मंदिर या पीपल के पेड़ की छाया में आसन बिछाकर बैठ कर पढ़ना बहुत लाभकारी माना जाता हैं।

  2. क्या हम घर पर शनि चालीसा पढ़ सकते हैं?

    अगर आप किसी कारणवश शनि देव के मंदिर नहीं जा पा रहें तो आप शनि चालीसा का प्ताह घर पर भी कर सकते हो। इससे शनि देव का प्रभाव कम होयगा।

  3. शनि देव को कौन सा तेल चढ़ाना अधिक फलदायी होता है ?

    शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाना सबसे अधिक फलदायी होता है।

  4. शनि को क्या पसंद नहीं है?

    शनि देव को ऐसे लोग बिलकुल पसंद नहीं जो बुजुर्गों, असहायों और बड़ों का अनादर करने हैं और हनुमान भक्त होकर भी मांस ,मछी और अंडा का सेवन करते हैं।

  5. श्री शनि चालीसा को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    भक्त श्री शनि चालीसा को रोजाना या शनिवार को पढ़ सकते हैं, जो भगवान शनि के लिए शुभ माना जाता है। नियमितता और ईमानदारी उच्चारण में अधिक महत्वपूर्ण हैं।

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